SCHD बनाम VYM बनाम VIG: ये डिविडेंड ETF एक दूसरे से कैसे भिन्न हैं?
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SCHD बनाम VYM बनाम VIG: ये डिविडेंड ETF एक दूसरे से कैसे भिन्न हैं?

लेखक: Andrew Kasimir

प्रकाशित तिथि: 2026-09-04   
अपडेट तिथि: 2026-09-04

श्वाब यूएस डिविडेंड इक्विटी ETF (SCHD), वैनगार्ड हाई डिविडेंड यील्ड ETF (VYM), और वैनगार्ड डिविडेंड एप्रिसिएशन ETF (VIG) ऐसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) हैं जो डिविडेंड देने वाली अमेरिकी कंपनियों में निवेश करते हैं, लेकिन इनका मकसद अलग-अलग है। SCHD यील्ड को कंपनी की वित्तीय मजबूती के मानकों के साथ जोड़ता है, VYM ज्यादा यील्ड वाले शेयरों में व्यापक निवेश देता है, और VIG उन कंपनियों पर फोकस करता है जिन्होंने समय के साथ अपना डिविडेंड बढ़ाया है।


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हर फंड को बनाने का तरीका तय करता है कि किन कंपनियों और सेक्टरों का वेटेज सबसे ज्यादा होगा। यही वजह है कि ब्याज दरों और आर्थिक हालात में बदलाव पर ये फंड अलग-अलग तरीके से प्रतिक्रिया देते हैं। इनमें से कोई भी खासतौर पर कम अस्थिरता वाला प्रोडक्ट नहीं है, और न ही व्यापक बाजार गिरावट से बचाव के लिए बनाया गया है।


इस लेख में आप क्या जानेंगे? 

इस लेख में बताया गया है कि SCHD, VYM, और VIG डिविडेंड देने वाली कंपनियों को कैसे चुनते हैं, और ग्रोथ पर फोकस रखने वाले फंड की तुलना में इनका प्रदर्शन अलग क्यों हो सकता है। साथ ही, यह भी समझाया गया है कि डिफेंसिव एक्सपोजर का क्या मतलब है, इसकी सीमाएं क्या हैं, और कॉन्ट्रैक्ट फॉर डिफरेंस (CFD) के जरिए ETF ट्रेड करने पर क्या बदल जाता है।


SCHD vs VYM vs VIG 

हर ETF एक अलग इंडेक्स को फॉलो करता है। यह इंडेक्स कुछ तय नियमों के आधार पर तय करता है कि फंड में कौन-सी कंपनियां शामिल होंगी और हर कंपनी को कितना वेटेज मिलेगा।


डिविडेंड वह भुगतान है जो कोई कंपनी अपने शेयरधारकों को देती है, आमतौर पर अपने मुनाफे या उपलब्ध नकदी में से। कोई ETF अपने पोर्टफोलियो में शामिल कंपनियों से डिविडेंड इकट्ठा कर सकता है और उसे फंड के शेयरधारकों में बांट सकता है।



ETF मुख्य फोकस फंड डिविडेंड को कैसे अप्रोच करता है मुख्य ट्रेड-ऑफ
SCHD डिविडेंड यील्ड और कंपनी की गुणवत्ता डिविडेंड इतिहास, यील्ड, पांच साल की डिविडेंड ग्रोथ, रिटर्न ऑन इक्विटी, और कर्ज के मुकाबले कैश फ्लो की समीक्षा के बाद 100 कंपनियों को चुनता है। इसकी स्क्रीनिंग प्रक्रिया VYM के मुकाबले ज्यादा केंद्रित (कॉन्सन्ट्रेटेड) पोर्टफोलियो बनाती है।
VYM व्यापक, ज्यादा यील्ड वाला एक्सपोजर ऐसी कंपनियों को ट्रैक करता है जिनकी डिविडेंड यील्ड आमतौर पर बाजार के औसत से ज्यादा होती है, और इसमें रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REIT) शामिल नहीं होते। ज्यादा यील्ड का मतलब हमेशा वित्तीय रूप से मजबूत कंपनी नहीं होता।
VIG लगातार डिविडेंड ग्रोथ ऐसी कंपनियों को ट्रैक करता है जिनका डिविडेंड बढ़ाने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है, और इसमें REIT शामिल नहीं होते। यह मौजूदा समय की सबसे ऊंची डिविडेंड यील्ड को टारगेट नहीं करता।

 

SCHD, डाओ जोंस यूएस डिविडेंड 100 इंडेक्स को ट्रैक करता है। इसमें शामिल होने के लिए कंपनियों को पिछले 10 साल में हर साल डिविडेंड देना जरूरी है। यह इंडेक्स कर्ज के मुकाबले कैश फ्लो, रिटर्न ऑन इक्विटी, डिविडेंड यील्ड, और पांच साल की डिविडेंड ग्रोथ के आधार पर कंपनियों की रैंकिंग करता है। कर्ज के मुकाबले कैश फ्लो से कंपनी की वित्तीय क्षमता का आकलन होता है, जबकि रिटर्न ऑन इक्विटी बताता है कि कंपनी शेयरधारकों की पूंजी का इस्तेमाल मुनाफा कमाने में कितनी प्रभावी ढंग से करती है। इसके बाद इंडेक्स 100 कंपनियों को चुनता है, जिससे SCHD की स्क्रीनिंग सिर्फ डिविडेंड यील्ड पर आधारित रणनीति से ज्यादा सख्त हो जाती है।


VYM, FTSE हाई डिविडेंड यील्ड इंडेक्स को फॉलो करता है, जिसमें ऐसे शेयर शामिल होते हैं जिनकी यील्ड आमतौर पर बाजार के औसत से ज्यादा होती है। यह फंड इन कंपनियों को करीब-करीब उसी अनुपात में रखता है, जिससे इसका एक्सपोजर SCHD के मुकाबले ज्यादा व्यापक हो जाता है। लेकिन यह व्यापक पहुंच SCHD की तरह मुनाफे और वित्तीय मजबूती की जांच के बिना मिलती है।


VIG, S&P यूएस डिविडेंड ग्रोअर्स इंडेक्स को फॉलो करता है और ऐसी कंपनियों पर फोकस करता है जिनका डिविडेंड बढ़ाने का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है। डिविडेंड ग्रोथ का मतलब है कि प्रति शेयर मिलने वाली राशि समय के साथ बढ़ी है। इसका यह मतलब नहीं है कि शेयर की कीमत या डिविडेंड यील्ड हमेशा बढ़ती ही रहे। इसलिए VIG में कम मौजूदा यील्ड वाली कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं, क्योंकि इसका चयन नियम आज की सबसे ऊंची यील्ड के बजाय लगातार बढ़ोतरी को तरजीह देता है।


डिविडेंड ETF, ग्रोथ फंड से कैसे अलग हैं? 

डिविडेंड फोकस्ड ETF में आमतौर पर ऐसी कंपनियां ज्यादा होती हैं जो पहले से इतना मुनाफा और नकदी कमा रही हैं कि उसका कुछ हिस्सा शेयरधारकों को लौटा सकें। वहीं, ग्रोथ पर फोकस रखने वाले फंड उन कंपनियों को ज्यादा वेटेज देते हैं जिनकी वैल्यू निवेशकों की भविष्य में होने वाली कमाई की उम्मीद पर टिकी होती है। यही वजह है कि ब्याज दरों या ग्रोथ की उम्मीदों में बदलाव होने पर दोनों तरह के फंड अलग-अलग प्रतिक्रिया देते हैं। उदाहरण के लिए, नैस्डैक-100 इंडेक्स को ट्रैक करने वाला Invesco QQQ Trust (QQQ) बड़ी टेक्नोलॉजी और ग्रोथ कंपनियों में भारी निवेश रखता है। इसकी कीमत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर होने वाले खर्च, सेमीकंडक्टर, क्लाउड कंप्यूटिंग, और डिजिटल विज्ञापन को लेकर उम्मीदों से काफी प्रभावित होती है। ऊंची ब्याज दरें महंगे वैल्यूएशन वाले ग्रोथ शेयरों पर भी दबाव डाल सकती हैं, क्योंकि नकदी और बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न के मुकाबले भविष्य का मुनाफा कम आकर्षक हो जाता है।


डिविडेंड फोकस्ड ETF किसी एक ग्रोथ थीम पर कम निर्भर होते हैं, लेकिन इनके अपने जोखिम भी होते हैं। फंड के चयन नियमों के आधार पर इनका सेक्टर मिश्रण फाइनेंशियल, इंडस्ट्रियल, हेल्थकेयर, कंज्यूमर, और एनर्जी शेयरों तक फैला हो सकता है। आर्थिक ग्रोथ, कर्ज लेने की लागत, कमोडिटी की कीमतें, और उपभोक्ता खर्च, इनमें से हर एक फैक्टर इन फंड को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकता है।


क्या डिविडेंड ETF डिफेंसिव होते हैं? 

अस्थिरता (वोलैटिलिटी) यह बताती है कि किसी कीमत में उतार-चढ़ाव कितना तेज और कितनी बार होता है। SCHD, VYM, और VIG खासतौर पर कीमतों में उतार-चढ़ाव को कम रखने के मकसद से कंपनियां नहीं चुनते, इसलिए इनका डिफेंसिव व्यवहार किसी कम-अस्थिरता नियम के बजाय इनके पोर्टफोलियो और सेक्टर एक्सपोजर से जुड़ा है।


जब निवेशक भविष्य की ग्रोथ के लिए वैल्यू की गई कंपनियों के बजाय मौजूदा मुनाफे वाली स्थापित कंपनियों को तरजीह देते हैं, तो डिविडेंड फोकस्ड ETF अलग तरह से प्रतिक्रिया दे सकते हैं। व्यापक सेक्टर मिश्रण टेक्नोलॉजी शेयरों पर निर्भरता भी कम करता है, जिससे कुछ बाजार गिरावटों के दौरान टेक्नोलॉजी-भारी फंड के मुकाबले इनमें कीमतों का उतार-चढ़ाव कम हो सकता है। नतीजा फंड के पोर्टफोलियो और बाजार में गिरावट की वजह पर निर्भर करता है।


इस "डिफेंसिव" टैग की स्पष्ट सीमाएं हैं, क्योंकि डिविडेंड देने वाली कंपनियां भी अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार के जोखिम से अछूती नहीं रहतीं। जब क्रेडिट घाटा बढ़ता है तो बैंकों को दिक्कत हो सकती है, मंदी के दौरान इंडस्ट्रियल कंपनियों के ऑर्डर घट सकते हैं, और तेल-गैस की कीमतें गिरने पर एनर्जी कंपनियां भी नीचे आ सकती हैं। यहां तक कि लंबे डिविडेंड इतिहास वाली कंपनियां भी मुनाफा और कैश फ्लो कमजोर होने पर भुगतान घटा या रोक सकती हैं।


ब्याज दरें एक और ट्रेड-ऑफ पैदा करती हैं। बॉन्ड की यील्ड बढ़ने पर निवेशकों को कमाई का एक वैकल्पिक जरिया मिल जाता है, जिससे डिविडेंड शेयरों की मांग घट सकती है। लेकिन इसका असर सभी सेक्टरों पर एक जैसा नहीं होता, इसलिए सिर्फ "डिविडेंड" टैग के बजाय फंड के पोर्टफोलियो पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।


इन्हीं वजहों से "डिफेंसिव" शब्द का मतलब सिर्फ यह होना चाहिए कि कोई फंड कुछ खास हालात में कैसा व्यवहार करता आया है, न कि यह कि हर गिरावट में उसका प्रदर्शन कैसा रहेगा। किसी डिविडेंड ETF में भी बड़ा नुकसान दर्ज हो सकता है, और जो फंड QQQ के मुकाबले कम गिरता है, वह भी इतना गिर सकता है कि ट्रेडिंग में बड़ा नुकसान हो जाए।


ट्रेडर्स को क्या तुलना करनी चाहिए? 

फंड का नाम सिर्फ एक शुरुआती जानकारी देता है, इसलिए SCHD, VYM, और VIG में से किसी एक को चुनने से पहले ट्रेडर्स को इनके नियमों और पोर्टफोलियो की तुलना करनी चाहिए। नीचे दिए गए बिंदु बताते हैं कि इनकी कीमतों में उतार-चढ़ाव कहां अलग हो सकता है:

  • डिविडेंड यील्ड: यह किसी कंपनी के सालाना डिविडेंड को उसके शेयर की कीमत के प्रतिशत के रूप में मापती है। डिविडेंड बढ़ने या शेयर की कीमत गिरने पर यील्ड बढ़ जाती है, इसलिए तेज गिरावट की वजह से बढ़ी हुई यील्ड कमजोर कमाई या संभावित डिविडेंड कटौती का संकेत भी हो सकती है। सिर्फ यील्ड से यह पता नहीं चलता कि कोई कंपनी वित्तीय रूप से मजबूत है या नहीं।

  • डिविडेंड ग्रोथ: लगातार बढ़ते भुगतान का इतिहास अतीत की निरंतरता दिखाता है, हालांकि यह भविष्य में बढ़ोतरी की गारंटी नहीं देता।

  • कंपनी की गुणवत्ता: मुनाफा, कैश फ्लो, और कर्ज का स्तर यह बताने में मदद करते हैं कि किसी कंपनी के पास अपना डिविडेंड बनाए रखने की वित्तीय क्षमता है या नहीं।

  • सेक्टर एक्सपोजर: किसी एक सेक्टर में बड़ा निवेश फंड को उस बाजार हिस्से को प्रभावित करने वाले हालात के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देता है।

  • कॉन्सन्ट्रेशन: होल्डिंग्स की संख्या कम होने पर हर कंपनी का फंड की कीमत पर असर ज्यादा होता है।

  • ब्याज दरों के प्रति संवेदनशीलता: बॉन्ड की यील्ड बढ़ने पर डिविडेंड शेयरों का सापेक्ष आकर्षण बदल सकता है, वहीं ब्याज दरों में बदलाव अलग-अलग सेक्टरों को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करता है। 


आखिरकार, चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि हर फंड कंपनियों को कैसे चुनता है। VYM का लक्ष्य व्यापक और ज्यादा यील्ड वाला एक्सपोजर है, VIG डिविडेंड ग्रोथ को तरजीह देता है, और SCHD यील्ड को वित्तीय मजबूती के मानकों के साथ जोड़ता है। इसके बावजूद, ट्रेडर्स को मौजूदा पोर्टफोलियो, सेक्टर एक्सपोजर, और ऐतिहासिक अस्थिरता की तुलना करनी चाहिए, क्योंकि सिर्फ फंड के नाम से यह पता नहीं चलता कि बदलते बाजार हालात में हर फंड कैसा प्रदर्शन करेगा।


डिविडेंड ETF खरीदना बनाम इसका CFD ट्रेड करना 

ETF के शेयर खरीदने पर निवेशक को फंड के एक हिस्से का मालिकाना हक मिलता है, जिसमें फंड द्वारा दिए जाने वाले किसी भी वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) को पाने का अधिकार भी शामिल है। वहीं, ETF का CFD ट्रेड करने पर ETF के मालिकाना हक के बिना फंड की कीमत में एक्सपोजर मिलता है। यह फर्क अहम है, क्योंकि CFD ट्रेडर्स को शेयरधारक वितरण के बजाय डिविडेंड एडजस्टमेंट मिलता है। 



ETF के शेयर खरीदना ETF का CFD ट्रेड करना
आपके पास फंड के शेयर होते हैं। आपके पास फंड का मालिकाना हक नहीं होता।
शेयरधारक के तौर पर फंड आपको वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) दे सकता है। डिविडेंड इवेंट को कैश एडजस्टमेंट के जरिए हैंडल किया जाता है।
सामान्य खरीद में लीवरेज की जरूरत नहीं होती। CFD में लीवरेज इस्तेमाल होता है, जिससे संभावित मुनाफा और नुकसान दोनों बढ़ जाते हैं।
आमतौर पर ETF की कीमत बढ़ने पर आपको फायदा होता है। आप कीमतों में तेजी और गिरावट, दोनों में ट्रेड कर सकते हैं।

 


EBC, स्टॉक, इंडेक्स, और ETF CFD पर डिविडेंड एडजस्टमेंट, अंडरलाइंग भुगतान के आधार पर लागू करता है। एक्स-डिविडेंड डेट पर, यानी जिस दिन से ETF अपने अगले वितरण के अधिकार के बिना ट्रेड होना शुरू करता है, लॉन्ग CFD पोजीशन को कैश एडजस्टमेंट मिलता है, जबकि शॉर्ट पोजीशन से उतनी ही राशि वसूली जाती है। यह एडजस्टमेंट अकाउंट बैलेंस और मुनाफे या नुकसान को प्रभावित करता है, लेकिन इससे ट्रेडर को फंड का मालिकाना हक या ETF शेयरधारक जैसे अधिकार नहीं मिलते।


लीवरेज जोखिम को भी बदल देता है। एक छोटी जमा राशि से बड़ी पोजीशन को नियंत्रित किया जा सकता है, इसलिए डिफेंसिव माने जाने वाले फंड में भी ट्रेड पर लगाई गई रकम के मुकाबले बड़ा मुनाफा या नुकसान हो सकता है। पोजीशन खोलने से पहले ट्रेडर्स को पोजीशन साइज, उसे खोलने के लिए जरूरी मार्जिन या जमा राशि, खरीद और बिक्री कीमत के बीच का स्प्रेड, डिविडेंड एडजस्टमेंट के नियम, और प्रोडक्ट की उपलब्धता जरूर जांच लेनी चाहिए।


जीरो कमीशन और स्वैप के साथ डिविडेंड फोकस्ड ETF CFD कैसे एक्सेस करें

जो ट्रेडर ग्रोथ-भारी फंड से आगे एक्सपोजर चाहते हैं, वे EBC पर 31 दिसंबर 2026 तक जीरो कमीशन और जीरो ओवरनाइट स्वैप फीस के साथ डिविडेंड फोकस्ड US ETF CFD ट्रेड कर सकते हैं। यह ऑफर कैंपेन के नियमों, प्रोडक्ट पात्रता, प्लेटफॉर्म की शर्तों, और क्षेत्रीय उपलब्धता के अधीन है। ट्रेडिंग शुरू करने से पहले यह पुष्टि करने के लिए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म जरूर देखें कि SCHD, VYM, और VIG आपके अकाउंट के लिए उपलब्ध हैं या नहीं।

अस्वीकरण: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से प्रदान की गई है और इसे वित्तीय, निवेश संबंधी या किसी अन्य प्रकार की ऐसी सलाह के रूप में अभिप्रेत नहीं किया गया है (और न ही ऐसा माना जाना चाहिए) जिस पर भरोसा किया जाए। इस सामग्री में व्यक्त कोई भी राय EBC या लेखक द्वारा यह सिफारिश नहीं करती कि कोई विशेष निवेश, प्रतिभूति, लेन-देन या निवेश रणनीति किसी विशिष्ट व्यक्ति के लिए उपयुक्त है।
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