प्रकाशित तिथि: 2026-09-07
अपडेट तिथि: 2026-09-07
सेबी ने 4 सितंबर को NSE के आईपीओ के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी किया, जिससे एक्सचेंज को 14.891 करोड़ मौजूदा शेयरों (करीब 6% इक्विटी) तक की ऑफर फॉर सेल (OFS) के साथ आगे बढ़ने की मंजूरी मिल गई। अनलिस्टेड मार्केट में चर्चा में रहे ऊंचे भाव के अनुमानों के आधार पर यह ऑफर 30,000 करोड़ रुपये के करीब या उससे ज्यादा तक पहुंच सकता है, जो Hyundai Motor India के करीब 27,870 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड को चुनौती दे सकता है।
NSE को हुंडई से आगे निकलने के लिए 14.891 करोड़ शेयरों की पूरी बिक्री पर करीब 1,872 रुपये प्रति शेयर का अंतिम ऑफर प्राइस चाहिए।

| NSE IPO का विवरण | मौजूदा स्थिति |
|---|---|
| सेबी की स्थिति | 4 सितंबर 2026 को ऑब्जर्वेशन लेटर जारी |
| अधिकतम पेशकश किए गए शेयर | 14.891 करोड़ |
| करीब हिस्सेदारी | 6% |
| ऑफर का ढांचा | 100% ऑफर फॉर सेल |
| फ्रेश इश्यू | नहीं |
| आधिकारिक आईपीओ आकार | अभी तय नहीं |
| प्राइस बैंड | अभी घोषित नहीं |
| प्रस्तावित लिस्टिंग एक्सचेंज | BSE |
| सब्सक्रिप्शन और लिस्टिंग की तारीखें | औपचारिक रूप से घोषित नहीं |
NSE की जून में दाखिल फाइलिंग में शेयरों की संख्या और पूरी तरह ऑफर-फॉर-सेल ढांचे की पुष्टि होती है। 7 सितंबर तक NSE के आधिकारिक ऑफर-डॉक्यूमेंट पेज पर अब भी DRHP और उसके बाद का एडेंडम ही दिख रहा था, प्राइस्ड रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) नहीं, जिससे अंतिम इश्यू वैल्यू और समयसीमा अभी तय नहीं है।
हुंडई मोटर इंडिया का 2024 का आईपीओ अब भी भारत का सबसे बड़ा आईपीओ है, जिसकी सकल ऑफर वैल्यू आम तौर पर करीब 27,870 करोड़ रुपये बताई जाती है। इस बेंचमार्क को NSE के अधिकतम 14.891 करोड़ शेयरों के ऑफर पर लागू करने से यह अहम सीमा तय होती है। आगे निकलने के लिए NSE को करीब 1,872 रुपये प्रति शेयर की कीमत चाहिए।
| NSE का ऑफर प्राइस | करीब ऑफर वैल्यू |
|---|---|
| ₹1,800 | ₹26,803 करोड़ |
| ₹1,872 | ₹27,875 करोड़ |
| ₹1,900 | ₹28,292 करोड़ |
| ₹1,975 | ₹29,409 करोड़ |
| ₹2,050 | ₹30,526 करोड़ |
आईपीओ को लेकर चर्चा में रहे 29,400 से 30,500 करोड़ रुपये के बीच के अनुमान असल में 1,975 से 2,050 रुपये प्रति शेयर के बीच के भाव अनुमानों पर आधारित हैं, न कि किसी औपचारिक रूप से घोषित ऑफर वैल्यूएशन पर। हाल की कुछ अन्य रिपोर्टों में 1,800 से 1,900 रुपये के बीच संभावित भाव की चर्चा हुई है, जिससे इश्यू का आकार करीब 26,800 करोड़ से 28,300 करोड़ रुपये के बीच रह सकता है।
रिकॉर्ड को लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है। करीब 1,800 रुपये का भाव हुंडई को आगे रखेगा, जबकि 1,900 रुपये का भाव NSE को उससे ऊपर पहुंचा देगा। इस अहम सवाल का जवाब अनलिस्टेड मार्केट के संकेतों से नहीं, बल्कि अंतिम प्राइस बैंड से मिलेगा।
NSE इस आईपीओ के जरिए न तो नए शेयर जारी करेगा और न ही उसे कोई नई पूंजी मिलेगी। प्रस्तावित ऑफर के सभी शेयर मौजूदा हिस्सेदारों की होल्डिंग से आएंगे, इसलिए इस सौदे से पब्लिक मार्केट में लिक्विडिटी तो बढ़ेगी, लेकिन NSE के बकाया शेयरों की संख्या नहीं बढ़ेगी। यह ढांचा भारत के 2026 के प्राइमरी मार्केट में एक बड़े बदलाव को भी दर्शाता है, जहां सेकंडरी शेयर बिक्री आईपीओ इश्यूअंस का एक बड़ा हिस्सा बन गई है।
सबसे बड़ा बिकवाली करने वाला समूह SBI Group है। अगस्त में आए एक एडेंडम में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और SBI कैपिटल मार्केट्स (SBICAPS) के बीच अधिकतम 2.475 करोड़ शेयर बांटे गए, जिसमें SBI की तरफ से 1.597 करोड़ शेयर और SBICAPS की तरफ से 0.878 करोड़ शेयर तक की पेशकश शामिल है। अन्य प्रमुख विक्रेताओं में MS Strategic (Mauritius), Canada Pension Plan Investment Board, Aranda Investments, Bank of Baroda, Stock Holding Corporation of India और कई सरकारी बीमा कंपनियां शामिल हैं।
LIC इस मौजूदा OFS में हिस्सा नहीं ले रही है और उसके NSE में करीब 10.72% हिस्सेदारी बनाए रखने की उम्मीद है।
इसलिए 30,000 करोड़ रुपये का ऑफर असल में NSE की मौजूदा हिस्सेदारी के हाथ बदलने का सौदा होगा, न कि NSE की बैलेंस शीट में 30,000 करोड़ रुपये की नई पूंजी आने का।
NSE ने पहली बार दिसंबर 2016 में आईपीओ दस्तावेज दाखिल किए थे, लेकिन उसकी कोलोकेशन सुविधा को लेकर हुई जांच ने लिस्टिंग को रोक दिया। कुछ ब्रोकरों को एक्सचेंज के इंफ्रास्ट्रक्चर तक तरजीही पहुंच मिलने के आरोपों के चलते जांच, इनफोर्समेंट कार्रवाई, अपील और डार्क-फाइबर से जुड़े मामले सामने आए।
लिस्टिंग की प्रक्रिया 2026 में फिर शुरू हुई। सेबी ने जनवरी में NSE को नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) दिया, और NSE ने 17 जून को नया DRHP दाखिल किया। जनवरी का NOC और सितंबर का ऑब्जर्वेशन लेटर अलग-अलग नियामकीय पड़ाव थे, जिनमें से दूसरे ने मौजूदा ऑफर दस्तावेजों को आगे बढ़ने की मंजूरी दी।
NSE ने लंबे समय से चल रहे कोलोकेशन और डार्क-फाइबर मामलों को कुल 1,491.21 करोड़ रुपये में सुलझाने की भी पहल की। एक्सचेंज ने 31 जुलाई को जरूरी सेटलमेंट भुगतान पूरा किया, जबकि इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने सेबी की संबंधित अपीलों का निपटारा कर दिया, जिससे आईपीओ की मंजूरी से पहले एक और बड़ी नियामकीय बाधा दूर हो गई।
यानी NSE की पहली आईपीओ कोशिश और उस बिंदु के बीच, जहां से आखिरकार प्राइसिंग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, करीब दस साल का फासला है।
NSE ने वित्त वर्ष 2026 (FY26) में परिचालन से 16,601 करोड़ रुपये की आय दर्ज की, जो FY25 से करीब 3% कम है, जबकि पूरे साल का शुद्ध लाभ करीब 10,302 करोड़ रुपये रहा।
बाजार में NSE की स्थिति असामान्य रूप से केंद्रित है। FY26 में इसकी हिस्सेदारी भारत के कैश-इक्विटी बाजार में 93.0%, इक्विटी फ्यूचर्स में 99.8% और प्रीमियम टर्नओवर के लिहाज से इक्विटी ऑप्शंस में 74.7% रही। इस दबदबे से एक्सचेंज को उन सभी सेगमेंट में गहरी लिक्विडिटी मिलती है, जो इसकी ट्रांजैक्शन आय का बड़ा हिस्सा बनाते हैं।
लेकिन बड़े आकार के बावजूद कारोबार में उतार-चढ़ाव का असर कम नहीं होता। FY26 में प्रमुख इक्विटी सेगमेंट में कारोबारी गतिविधि में नरमी आई, जिससे यह साफ हुआ कि बाजार भागीदारी और नियमों में बदलाव का असर ट्रांजैक्शन आय पर कैसे पड़ सकता है। NSE का दबदबा उसकी प्रतिस्पर्धी स्थिति को तो मजबूत बनाता है, लेकिन यह कारोबार को समूचे उद्योग में ट्रेडिंग वॉल्यूम में आने वाले बदलावों से पूरी तरह नहीं बचा सकता।
जून 2026 तिमाही में दोबारा बढ़त दिखी। परिचालन से आय सालाना आधार पर 13.1% बढ़कर 4,560 करोड़ रुपये रही, ऑपरेटिंग EBITDA 14.8% बढ़कर 3,594 करोड़ रुपये पहुंचा और शुद्ध लाभ 6.7% बढ़कर 3,120 करोड़ रुपये रहा। ऑपरेटिंग EBITDA मार्जिन 79% तक पहुंच गया।
1,975 से 2,050 रुपये प्रति शेयर के भाव अनुमानों पर NSE की अनुमानित इक्विटी वैल्यू करीब 4.89 से 5.07 लाख करोड़ रुपये होगी। FY26 के मुनाफे के लिहाज से यह ट्रेलिंग आय का करीब 47 से 49 गुना है। 1,800 रुपये के ऑफर भाव पर अनुमानित इक्विटी वैल्यू घटकर करीब 4.46 लाख करोड़ रुपये और ट्रेलिंग मल्टीपल करीब 43 गुना रह जाएगा।
इसलिए वैल्यूएशन को लेकर बहस इस बात पर टिकी है कि NSE के दबदबे की कितनी कीमत लगाई जाए। इसकी मार्केट हिस्सेदारी, लिक्विडिटी और मार्जिन एक स्कार्सिटी प्रीमियम को सही ठहराते हैं, लेकिन ट्रेडिंग गतिविधि पर इसकी निर्भरता का मतलब है कि इसका मुनाफा बाजार के वॉल्यूम, प्रतिस्पर्धा में बदलाव और डेरिवेटिव्स से जुड़े नियामकीय बदलावों के जोखिम में रहता है।
नियामकीय प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है, लेकिन कारोबारी शर्तें अभी तय नहीं हैं। आधिकारिक आईपीओ वैल्यू, अनुमानित मार्केट कैपिटलाइजेशन और रिकॉर्ड की तुलना तय होने से पहले NSE को अपने अपडेटेड ऑफर दस्तावेज और अंतिम प्राइस बैंड प्रकाशित करने होंगे।
4 सितंबर की मंजूरी के बाद आई रिपोर्टों में सितंबर में ही लॉन्च होने, महीने के मध्य के आसपास प्राइस बैंड की घोषणा और 25 सितंबर को संभावित लिस्टिंग की चर्चा है। लेकिन ये तारीखें अभी तीसरे पक्ष के अनुमान हैं, NSE का घोषित कार्यक्रम नहीं। 7 सितंबर तक NSE के आधिकारिक ऑफर-डॉक्यूमेंट पेज पर प्राइस्ड RHP प्रकाशित नहीं हुआ था।
पुष्टि की गई स्थिति इससे कहीं सीमित है। NSE अधिकतम 14.891 करोड़ शेयरों के OFS के साथ आगे बढ़ सकता है और BSE पर लिस्ट होने का प्रस्ताव रखता है। यह सौदा 30,000 करोड़ रुपये का ऑफर और भारत का सबसे बड़ा आईपीओ बनेगा या नहीं, यह अब भी अंतिम भाव पर निर्भर करता है।
नहीं। NSE ने अभी अपना अंतिम प्राइस बैंड घोषित नहीं किया है, इसलिए ऑफर का मौद्रिक आकार अभी तय नहीं है। करीब 30,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा बाजार से जुड़ा एक अनुमान है, जो अधिकतम 14.891 करोड़ शेयरों की प्रस्तावित बिक्री पर ऊंचे भाव के अनुमान लगाकर निकाला गया है।
भारतीय नियमों के तहत कोई भी स्टॉक एक्सचेंज अपनी सिक्योरिटीज को औपचारिक रूप से खुद अपने ही एक्सचेंज पर लिस्ट नहीं कर सकता। इसलिए NSE के ऑफर दस्तावेजों में लिस्टिंग एक्सचेंज के रूप में BSE Limited का प्रस्ताव है। NSE पहले भी संकेत दे चुका है कि उसके शेयर एक 'परमिटेड-टू-ट्रेड' ढांचे के तहत NSE पर भी कारोबार कर सकते हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के तहत औपचारिक सेल्फ-लिस्टिंग की अनुमति नहीं है।
7 सितंबर 2026 तक सब्सक्रिप्शन की औपचारिक तारीखों की घोषणा नहीं हुई थी। मौजूदा रिपोर्टों में सितंबर में लॉन्च और महीने के आखिर में संभावित लिस्टिंग का जिक्र है, लेकिन जब तक NSE अपडेटेड ऑफर दस्तावेज और औपचारिक कार्यक्रम प्रकाशित नहीं करता, तब तक यह समयसीमा अस्थायी ही रहेगी।
NSE ने उन नियामकीय बाधाओं को पार कर लिया है, जिनकी वजह से उसकी लिस्टिंग करीब एक दशक तक टलती रही। अब बची है केवल एक आंकड़ों की परीक्षा। अगर पूरे ऑफर का भाव करीब 1,872 रुपये प्रति शेयर या उससे ज्यादा रहता है, तो NSE हुंडई से आगे निकल सकता है, जबकि इससे काफी कम भाव पर भारत का आईपीओ रिकॉर्ड जहां है, वहीं बना रहेगा।